'सूर्यवंशी' से पहले इन फिल्मों में दिखा 1993 बम ब्लास्ट का दर्द

अक्षय कुमार और कटरीना कैफ की अपकमिंग फिल्म 'सूर्यवंशी' का ट्रेलर आगामी 2 मार्च को रिलीज होगा। वहीं, शनिवार को मुंबई में फिल्म डायरेक्टर रोहित शेट्टी ने अपनी फिल्म का ट्रेलर अपने कुछ करीबी दोस्तों और मीडिया के लोगों को दिखाया। ट्रेलर से पता चला कि 'सूर्यवंशी' की कहानी 1993 में हुए मुंबई बम धमाकों पर बेस्ड है। इस बम धमाके में जो मुंबई पर बीता और पीड़ितों ने जो सहा यह दर्द बॉलिवुड की फिल्मों में कई बार, अलग-अलग तरह से नजर आया। फिल्म से पता चलता है मुंबई की जनता का दर्द बॉलिवुड ने कई बार 1993 ब्लास्ट की घटना और उसके दर्द को कहानी के माध्यम से बड़े पर्दे पर उतार कर आम जनता तक पहुंचाने की कोशिश की है।धमाकों पर बेस्ड फिल्मों ने दर्शकों को सोचने और रोने पर मजबूर भी किया है। कई फिल्मकारों ने यह भी दिखाया है कि कैसे मुंबई के लोग आतंक से लड़कर दोबारा खड़े हो जाते हैं और नई उमंग के साथ अपनी जिंदगी जीते हैं। सबसे पहले आई डायरेक्टर मणिरत्नम की फिल्म 'बॉम्बे' अब तक मुंबई बम धमाकों पर बनीं फिल्मों में सबसे ऊपर है डायरेक्टर मणिरत्नम की फिल्म 'बॉम्बे', यह फिल्म साल 1995 में बनाई गई थी। फिल्म को हिंदी के अलावा तमिल और तेलुगू में भी डब किया गया था। 'बॉम्बे' ने बॉक्स ऑफिस पर अच्छी कमाई की थी। बॉम्बे' को जहां दर्शकों का जमकर प्यार मिला, वहीं इस फिल्म को 10 से भी ज्यादा नैशनल लेवल के अवॉर्ड भी मिले थे। विवादों में फंसी 'ब्लैक फ्राइडे'मणिरत्नम की 'बॉम्बे' के बाद डायरेक्टर अनुराग कश्यप की फिल्म 'ब्लैक फ्राइडे' ने मुंबई के 1993 के बम धमाकों की कहानी को एक बार फिर से सामने लाया। 1993 के बॉम्बे बम धमाकों के बारे में हुसैन जैदी की एक किताब 'ब्लैक फ्राइडे: द ट्रू स्टोरी ऑफ द बॉम्बे बम ब्लास्ट' पर आधारित इस फिल्म में उन घटनाओं का जिक्र किया गया, जो धमाकों और उसके बाद की पुलिस जांच की वजह बनीं। केके मेनन, आदित्य श्रीवास्तव, पवन मल्होत्रा, किशोर कदम और जाकिर हुसैन जैसे कलाकारों की अहम भूमिका वाली यह फिल्म विवादों में फंस गई और यह कई सालों के बाद रिलीज हो पाई। 2004 के लोकार्नो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में हुआ फिल्म का प्रीमियर'ब्लैक फ्राइडे' का प्रीमियर 2004 के लोकार्नो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में हुआ था और इसे उसी साल भारत में रिलीज किया जाना था, लेकिन 1993 के बम धमाकों के एक समूह द्वारा फिल्म की रिलीज को चुनौती देने के लिए दायर याचिका के बाद बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक स्टे जारी किया। जब तक मामले पर फैसला नहीं सुनाया जाता, तब तक उसे प्रदर्शित नहीं किया जा सकता था। यह भी पढ़ेंः 2007 में रिलीज हुई फिल्म 9 फरवरी, 2007 को फैसला सुनाए जाने के बाद भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने इसके प्रदर्शन की अनुमति दी और साल उसी साल यह फिल्म रिलीज हुई। फिल्म को आलोचनात्मक प्रशंसा मिली, इसने लॉस एंजिल्स के भारतीय फिल्म महोत्सव में ग्रैंड ज्यूरी पुरस्कार जीता और लोकार्नो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में गोल्डन लेपर्ड पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया।


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